जन्माष्टमी के दूसरे दिन भी भील समाज ने किया गवरी नाट्य ,दिया भारतीय परम्परा का परिचय
रायला- ( सुरेन्द्र खटीक ) लाम्बिया कलां में एक बार फिर भील समाज द्वारा कालका माता जी के मंदिर में गवरी नृत्य का कार्यक्रम किया जा रहा है । गवरी को लाम्बिया के ग्रामवासी व आस पास के गावों के लोग गवरी को देखने लिए आ रहे है।
भील समाज के लोंगो के द्वारा गवरी में अनेक प्रकार के कार्यक्रम किया जाता है।
गवरी एक प्राचीन खेल है जो कई पीढ़ियों से चला आ रहा है जो अभी तक भील समाज गवरी को नही भुला है। गवरी को भीलो के खेडा के लोग द्वारा लाम्बिया कलां में हर साल किया जाता है भील समाज ही ऐसी जाती नजर आती है आज के इस दौर में जो परम्परा को ओर भारतीय संस्कृती को समझ कर उसको अपने पीढ़ी ओर परिवार का हिस्सा बना रखा है ,वरना कहीं समाज तो अपनी प्रथा से विचलित हो चुके है।
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