आज से दिल्ली में शुरू होगी बीजेपी की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक, 2019 की तैयारियां शुरु

नई दिल्लीः राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक अाज से शुरू हो रही है। इसमें पार्टी समाज के सभी वर्ग के लोगों के बीच 'सामाजिक समरसता' के मैसेज पर जोर देगी। ये मीटिंग दिल्ली के अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर पर होगी।

बैठक में पहले हर राज्य से उसकी रिपोर्ट ली जाएगी और उसके बाद उसे चुनावी एजेंडा सौंपा जाएगा। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत सभी प्रमुख केंद्रीय मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और कार्यकारिणी सदस्य भाग लेंगे। कार्यकारिणी की बैठक से पहले भाजपा के पदाधिकारियों की बैठक होगी। बैठक में चुनावों को लेकर संगठनात्मक तैयारी, बूथ प्रबंधन, केंद्र और राज्यों की अहम योजनाओं के कार्यान्वयन की स्थिति आदि पर चर्चा होगी।

अटल की स्मृतियों के साए में होगी बैठक
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में हो रही इस बैठक में पार्टी अपने शीर्ष नेता के प्रति विशेष प्रस्ताव व श्रद्धांजलि व विभिन्न भाषणों के जरिए उनके प्रति कृतज्ञता जाहिर करेगी। पार्टी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि यह भाजपा की पहली बैठक है, जिसमें अटल नहीं होंगे। इसके पहले वे अस्वस्थता के चलते कई बार बैठक में नहीं आ सके, लेकिन पार्टी को उनकी मौजूदगी का अहसास रहता था। अब उनका मार्गदर्शन ही पार्टी का पथ प्रदर्शक बनेगा।

बैठक में इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा
बैठक में सरकार की कल्याण योजनाओं और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा किए जाने की उम्मीद है। इसमें किसानों को फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी के सरकार के फैसले, नेशनल सिटिजंस रजिस्‍टर, अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के लोगों के अधिकारों की रक्षा को लेकर उठाए गए कदम, ओबीसी राष्ट्रीय आयोग को संवैधानिक दर्जा देने आदि के बारे में भी चर्चा हो सकती है। बैठक में 2019 लोकसभा चुनाव और इस साल होने वाले राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी के बारे में भी चर्चा होगी।

गौरतलब है कि बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत में गिरावट, पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में वृद्धि को लेकर विपक्ष हमलावर है।

नोटबंदी और राफेल सौदे को लेकर भी विपक्ष सरकार पर निशाना साध रहा है। इसके अलावा संसद के मॉनसून सत्र के दौरान पारित अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण संशोधन विधेयक का सवर्ण विरोध कर रहे हैं। गुरुवार को सवर्ण समाज से जुड़े कुछ कथित संगठनों के भारत बंद का आयोजन भी किया था।


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