5 माह से पेंशन के लिए भटक रहे है राज्यस्तरीय सम्मानित शिक्षक"विभागीय चक्रव्यूह में उलझे गुरुदेव



शाहपुरा (गणेश सुगंधि)04-09-18   समाज में जहां गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा दर्जा देकर पूजाा जाता हैै तथा प्रत्येक शिक्षक दिवस पर विभिन्न स्तरों पर शिक्षकोंं को सम्मानित कर  उनके  कार्यों  की प्रशंसा की जाती है । वहीं वर्तमान समय में पिछले 5 सालों के कार्य को लेकर राज्य सरकार अपने जन कल्याणकारी योजनाओं का ढिंढोराा पीट रही और प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी शिक्षक दिवस पर राजधानी में हजारों शिक्षकों को  सम्मानित  किए जाने का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। ऐसे में  राज्य स्तर पर पुरस्कृत सेवानिवृत्त शिक्षक  पिछले 5 महीनों से  सातवें वेतन आयोग  के लगने के बाद अपनी पेंशन  के लिए  विभागों के चक्कर लगाने को मजबूर है। सुराज का दावा करने वाली सरकार के विभिन्न विभागों केेे चक्रव्यूह में फसे गुरुदेव अपनी ही सेवा का पारिश्रमिक प्राप्त करने से वंचित हो रहेे हैं। वाक्या है कस्बा निवासी राज्य स्तरीय पुरस्कृत व पूर्व एनसीसी अधिकारी हिंदी व्याख्याता के रूप में उत्कृष्ट सेवा देने के पश्चात सेवानिवृत्त हुए शिक्षक निर्मल वर्मा का। विदित है की पिछले वर्ष अगस्त माह के अंत में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेनेवाले शिक्षक वर्मा को सितंबर माह में सेवानिवृत्ति लेने केे बाद 7 माह बाद मार्च में पेंशन मिली थी। परंतु अप्रैल18 में राज्य सरकार द्वाराा लागू किए गए सातवा वेतन आयोग शिक्षक के लिए नहींं परेशानी ले आया। सातवां वेतन आयोग लगनेे के बाद सेवानिवृत्त शिक्षक वर्मा को अगस्त माह बीत जाने तक पेेेंशन नहीं मिल पाई।
*विभागीय चक्रव्यूह में उलझे गुरुदेव*
विभागीय चक्करघिन्नी प्राय आम आदमी के समझ से परे है। ऐसे में विद्यार्थियों को ज्ञान देकर उच्च पदों तक पहुंचाने वाले सेवानिवृत्त गुरुदेव स्वयं विभागीय चक्रव्यू में उलझ गए हैं। पिछले 5 माह से पेंशन नहीं मिलने पर शिक्षक वर्मा ने बैंक अधिकारियों से लेकर स्थानीय उप कोषाधिकारी विभाग, पेंशन शिकायत पालना प्रकोष्ठ जयपुर, जिला कलेक्टर भीलवाड़ा के साथ ही राज्य सरकार के संपर्क पोर्टल तथा 181 पर कई बार शिकायत दर्ज कराने पत्र व्यवहार करने के बाद भी समस्या का निराकरण नहीं हो पाया। हर विभाग इस समस्या को दूसरे विभाग पर थोप कर अपने हाथ खड़े कर दे रहा है। ऐसे में एक और जहां 2005 में राज्य सरकार ने जिस शिक्षक को राज्य स्तर पर श्रेष्ठ शिक्षक होने के खिताब से नवाजा वही आज अपने सेवाश्रम के लिए भटकने को मजबूर है। गौरतलब है कि राज्य सरकार व मानव आयोग के स्पष्ट आदेश पारित है कि सात दिवस में पेंशन का भुगतान नहीं होने पर संबंधित कर्मचारी/अधिकारी से ब्याज सहित वसूली की जा कर प्रार्थी को करनी होती है। फिर भी विशेष अधिकारियों द्वारा शिकायत पालना प्रकोष्ठ व जिला कलेक्टर के आदेशों की पालना सुनिश्चित नहीं हो पा रही है ऐसे में सम्मानित शिक्षक किस के आगे गुहार लगाएं।


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