गौ संरक्षण से ही राष्ट्र का होगा विकास-शर्मा,, विहिप के गौ रक्षा विभाग द्वारा महिला प्रशिक्षण शिविर आयोजित
शाहपुरा = (गणेश सुगंधि) 02- 09ब 18 जगत जननी गौ माता जिसके दुग्ध से मानव जीवन पल्लवित होता है का अपशिष्ट गोबर और गोमूत्र भी दवा से कम नहीं है। भारतीय संस्कृति जो के विश्व के सबसे प्राचीन व समृद्ध संस्कृति है परंतु पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव से अपने मूल स्वरूप से विकृत हो रही है तथा जगत का पालन करने वाली गौ माता आज तिरस्कार झेल रही है। गौ माता के संरक्षण से ही राष्ट्र का विकास हो पाएगा यह बात ईटमारिया ग्राम पंचायत के ग्रामपंचायत के करमडास ग्राम में विश्व हिंदू परिषद के गौ रक्षा विभाग द्वारा आयोजित महिला प्रशिक्षण शिविर में गौ रक्षा विभाग के प्रांताध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा ने कही। उन्होंने बताया कि प्राचीन ग्रंथों वेद पुराणों में भी गौ माता के महान गुणों का विवेचन किया गया है। कार्यक्रम में क्षेत्रीय गौरक्षा प्रमुख सुरेश सेन ने बताया कि प्रतिदिन गौ माता के दर्शन और सेवा करने से मनुष्य का कल्याण हो जाता है तथा गोपालन करना आर्थिक दृष्टि से भी काफी लाभकारी है। गोपालन से दूध के साथ ही गोबर और गोमूत्र से विभिन्न उत्पाद तैयार कर रोजगार के कार्य किए जा सकते हैं। प्रांत गौरक्षा प्रमुख राजेंद्र पुरोहित ने कार्यक्रम के दौरान पंचगव्य साधनों से नित्यकर्म में कार्य आने वाले विभिन्न सामग्रियों के निर्माण की विधियां शिविरार्थियों को बता कर उनका उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। शिविर में गोमूत्र से फिनाइल, धूपबत्ती, मच्छर बत्ती, दन्तमंजन, साबुन तथा अन्य उपयोगी औषधियां भी बनवा कर शिविरार्थियों को उनके लाभ से रूबरू करवाया गया। विभाग के प्रमुख उमेश पाराशर ने बताया कि पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव से भारतीय वैदिक संस्कृति धीरे धीरे पतन की ओर बढ़ रही है और इस पतन से मानव का भी पतन हो रहा है। पश्चिमी सभ्यताओं के अंधानुकरण का प्रभाव वर्तमान में हर क्षेत्र में पड़ रहा है जीवन यापन करने हेतु मुख्य व्यवस्था भोजन भी आज विभिन्न रासायनिक प्रक्रियाओं के कारण दूषित हो गया है। खेती में रासायनिक उर्वरकों असंतुलित प्रयोग से जमीन की उर्वरा क्षमता तो समाप्त हो ही रही है उपज भी जहरीली हो रही है। जिससे हार्ट अटैक, ब्लड प्रेशर ,शुगर जैसी बीमारियां आम हो गई है। गौ रक्षा विभाग के लादू लाल वैष्णव ने बताया कि पुनः खेती में जैविक उपयोगों को बढ़ावा देना ही होगा। इस हेतु उन्होंने खेती में गोबर की खाद तथा रसायनिक पेस्टीसाइड की जगह गोमूत्र तथा प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में उपस्थित रहे गौ रक्षक संत त्र्यंबकेश्वर महाराज ने बताया कि एक और तो गाय को सनातन धर्मी माता का दर्जा देते हैं वही दूध नहीं देने की अवस्था में उसे रोड पर लावारिस की तरह छोड़ दिया जाता है। यह सबसे बड़ा पाप है मां शब्द धरती का सबसे सात्विक और पूज्यनीय नाम है। गौ माता के साथ ऐसा कृत्य करने वाले पाप के भागी होते हैं। गौ रक्षा विभाग के भीलवाड़ा जिला अध्यक्ष कृष्ण गोपाल अग्रवाल तथा जिला उपाध्यक्ष राधेश्याम सोलंकी ने बताया कि बिना दूध देने वाली गाय भी अपने मल मूत्र मात्र से ही गोपालक को अच्छी खासी आमदनी दिला सकती है । आज जैविक खाद्यान्नों कि बाजार में भारी मांग है और वह बाजार भाव से दोगुने भाव में बिकते हैं। ऐसे में गौ माता के सहयोग से उन्होंने ग्रामीणों को जैविक खेती करने के लिए प्रेरित किया। प्रांतीय गौशाला संपर्क प्रमुख भगवान शर्मा ने पंचगव्य से तैयार होने वाले विभिन्न उत्पादों के फायदे बताते हुए कहा कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां हमारे इस ज्ञान से करोड़ों रुपए कमा रहे हैं और हम जो कि यह जानकारी सदियों से रखते हुए भी अज्ञानी बने हुए हैं। उन्होंने शिविर में मौजूद महिलाओं और छात्राओं को पंचगव्य साधन से बनने वाले सामग्रियों की जानकारी देकर कुटीर उद्योगों के माध्यम से खासी आमदनी का स्रोत बताया। स्थानीय सरपंच कैलाश चंद शर्मा ने उक्त कार्यक्रम हेतु आयोजकों का आभार जताते हुए बताया कि क्षेत्र का मुख्य व्यवसाय कृषि होने के साथ ही पशुपालन भी मुख्य व्यवसाय है। ऐसे में गौ माता जो कि विभिन्न गुणों की खान है उसका संरक्षण करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि शिविर से मिली जानकारियां ग्रामीणों को प्रोत्साहित करेगी तथा इससे गौरव संरक्षण को संबल प्राप्त हो सकेगा। कार्यक्रम में राम नारायण कुमावत, कृष्ण गोपाल शर्मा, वेदप्रकाश खटिक आदि वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। इस दौरान शाहपुरा जिले सहित बरुंदनी क्षेत्र की सैकड़ों बालिकाएं व महिलाएं तथा अन्य ग्रामीण मौजूद रहें।
01 गौ रक्षा विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में संबोधित करते अतिथि
02महिला प्रशिक्षण शिविर में पंचगव्य से साबुन बनाना सीखती बालिकाएं
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