कांग्रेस-भाजपा के सामने कैसा रहेगा नजारा निर्दलिय मालवीय क्या फिर खडे होगें दुबारा



दिलीप मेहता-मांड़लगढ़
राजस्थान के भीलवाडा जिले की  मांड़लगढ़ विधानसभा क्षैत्र के हुये उप चुनाव में* कांग्रेस के बागी रहे प्रत्याशी *पूर्व प्रधान गोपाल मालवीय को रेकार्ड तौड करीब 40000 मतो के मिलने से एक बार फिर यह विधानसभा सीट सुर्खियों में रहने वाली है* । उप चुनाव जीतने के बाद *कांग्रेस के विधायक विवेक धाकड* फिर टिकट की दौड में है तो *कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेता पूर्व विधायक कुं प्रदीपकुमार सिंह* भी प्रबल दावेदार है । वहीं *भाजपा के लिये* उप चुनाव में पराजित रहे *जिलाप्रमुख शक्तीसिंह हाडा* विकास के काम करवाने के सपने के साथ फिर प्रमुख दावेदार है तो *पूर्व विधायक बद्रीप्रसाद गुरूजी* भी इस बार प्रबल दावेदार है । अगर महिला को टिकट मिलता है तो *माड़लगढ़ पं. स. प्रधान घनश्याम कंवर* का नाम भी प्रमुख रहेगा । लेकिन इनके अलावा दोनो दलो में और भी नाम टिकट की दौड में शामिल है । दुसरी और *निर्दलिये चुनाव लड कर रेकार्ड मत लाने वाले गोपाल मालवीय पर आज भी सभी की निगाहे टिकी हुई है* ।
आज के समय में जन चर्चाओ के अनुसार दोनो दलो में गुटबाजी की सरसराहट सुनाई देने लगी है और स्थानीय स्तर पर अपना रूख अलग अलग चला रहे है । *उपचुनाव के 2-3 माह बाद से ही गोपाल मालवीय प्रचार प्रसार व सोशल मीडिया से लेकर होर्डिंग तक* से दूर नजर आते दिख रहे है ।
*लेकिन मालवीय आमजन तक जनसम्पर्क* कर रहे है जिसका प्रचार प्रसार नहीं कर रहे है ? आमजन में चर्चायें यह भी जारी है कि क्या *मालवीय कांग्रेस में शामिल होगें* इसको लेकर भी अभी तक संशय बना हुवा है । *दुसरी और कुछ का मानना है कि इस बार गोपाल मालवीय भाजपा से भी चुनाव लड सकते है* । इस पर चर्चायें यह भी है कि *मालवीय उप चुनाव के बाद से ही मुख्यमंत्री राजे के सम्पर्क में भी है*  । कहा जा रहा है कि मालवीय 2-3 बार मुख्यमंत्री से मुलाकात भी कर चुके है । *ऐसी विकट स्थिति में आनेवाले समय में इसी साल होने वाले विधानसभा के चुनाव में  मांड़लगढ़ विधानसभा सीट* फिर सुर्खियों में रहने वाली है ।
उपचुनाव में *मुख्यमंत्री राजे ने खुब जोर लगाकर मांड़लगढ़ सीट के प्रचार प्रसार में तीन दिन खुद रहकर मंत्रियों को लगाये रखा* फिर भी करारी हार झेलनी पडी तथा *पहली बार कांग्रेस ने एकजुटता से चुनाव जीत कर भाजपा को हराया* वह जगजाहिर है । लेकिन उपचुनाव के दौरान मतो की गिनती के दिन करीब 40000 मत लेकर निर्दलिय गोपाल मालवीय की "मशीन" [ चुनाव चिन्ह ]  ने जो सिलाई की उससे कांग्रेस व भाजपा भी आजतक हतप्रभ है* । आनेवाले समय में क्या मालवीय को वापस मनाकर कांग्रेस में लाया जायेगा या फिर भाजपा भी अपनी और मिलाने का प्रयास करेगी इस पर आमजन की निगाहै किस और रहेगी और *मालवीय के कदम किस तरफ होगे या फिर निर्दलिय चुनाव लड कर चुनावी दंगल में रहकर सामना करेगे इस पर आनेवाला समय  क्या और कैसा रहकर दिखाई देगा ..और आगे कुछ-कुछ होगा या नही..... यह राम ही जाने।


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